March 18, 2011

दो थके हुए पांव

दो थके हुए पांव थोड़ा चलते हैं, गीले रास्तों पर थोड़ा फिसलते  हैं| कोरी धुप में थोड़ी बारीश होती है, घने सन्नाटे  में एक गूँज खोती है| अँधेरे में आती हुई रौशनी खलती है, चाँद की गर्मी में रात जलती […]